– लखनऊ विश्वविद्यालय के दो विधि छात्र गिरफ्तार
नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान कथित हंगामे और न्यायालय की कार्यवाही में व्यवधान डालने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के दो छात्रों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान के रूप में हुई है। दोनों के विरुद्ध दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की गई है।
मामला 10 जुलाई 2026 का है। एफआईआर के अनुसार, उस दिन सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-13 में विशेष अनुमति याचिका (SLP) संख्या 31367/2026, प्रबल प्रताप एवं अन्य बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश की सुनवाई चल रही थी। शिकायत सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा शाखा के एक कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं उपस्थित प्रबल प्रताप सिंह ने कथित रूप से अदालत की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कोर्टरूम में गाली-गलौज और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, कागजात फेंके तथा ऐसा व्यवहार किया जिससे कुछ समय के लिए न्यायालय की कार्यवाही प्रभावित हुई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों और स्टाफ ने कोर्टरूम का अनुशासन बनाए रखने तथा उन्हें शांत करने का प्रयास किया, तब आरोपी ने कथित रूप से शिकायतकर्ता के साथ धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। इसके बाद सुरक्षा शाखा के कर्मचारी ने पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण देते हुए तिलक मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सुरक्षा स्टाफ के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों, कोर्ट परिसर के सुरक्षा रिकॉर्ड तथा अन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि (लॉ) के छात्र हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। कोर्ट परिसर में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं। मामले के तथ्यों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।


