लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। प्रदेश के पांच जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि छह नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी नीम करोली तपोस्थली तक पहुंच गया है। खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं।
लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भर गया है। सरकारी और निजी स्कूल भी बाढ़ की चपेट में हैं। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने पीने के पानी और भोजन की समस्या भी बढ़ने लगी है।
सीतापुर में सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। वहीं गोंडा में घाघरा नदी के बढ़े जलस्तर से तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के 10 गांव प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा, दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा है। लोगों की आवाजाही के लिए प्रशासन ने 50 से ज्यादा नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू के कटान से नवाबगंज के निचले इलाकों में 20 बीघा से अधिक फसल और जमीन नदी में समा चुकी है।
शाहजहांपुर में बाढ़ का पानी अपने साथ मुसीबत भी लेकर पहुंचा। मंगलवार सुबह आबादी के बीच एक करीब 6 से 7 फीट लंबा मगरमच्छ पहुंच गया। वह एक मकान के मुख्य दरवाजे तक जा पहुंचा, लेकिन दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ लिया।
उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब घटने लगा है, लेकिन पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से 46 सेंटीमीटर ऊपर है। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत कई इलाकों में पानी भरा है। सड़कों पर जलभराव के कारण लोगों के आवागमन के लिए मोहल्लों में नावें चलानी पड़ रही हैं।
प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं घरों में पानी घुसा है तो कहीं सड़कें और स्कूल डूबे हैं। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।


