नवाबगंज। नगला जाटवन गांव में जमीन के विवाद के बीच मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। गांव के बाहर झोपड़ी डालकर रह रहे 45 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार जाटव दीवार गिरने से ईंटों के मलबे में दब गए। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला। गंभीर हालत में उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान शाम करीब चार बजे धर्मेंद्र ने दम तोड़ दिया।
नगला जाटवन निवासी धर्मेंद्र कुमार गांव के बाहर झोपड़ी डालकर रह रहे थे। परिजनों के मुताबिक, जिस जमीन पर वह रह रहे थे, उसे पड़ोस के कुछ लोग अपना बताते थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे एक पड़ोसी वहां पहुंचा। आरोप है कि उसने दीवार को धक्का देकर गिरा दिया। उस समय धर्मेंद्र वहीं बैठे थे। अचानक दीवार गिरने से वह ईंटों के नीचे दब गए।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। धर्मेंद्र की बहन मंजू देवी अपने भाइयों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। परिजनों ने काफी प्रयास के बाद ईंटें हटाकर धर्मेंद्र को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल सीएचसी ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में उपचार के दौरान शाम करीब चार बजे उनकी मौत हो गई।
धर्मेंद्र चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़े थे। उनके भाइयों के नाम महेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह और रविंद्र सिंह हैं। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। माता-पिता का कई वर्ष पहले निधन हो चुका है। धर्मेंद्र की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
मृतक के भाई जितेंद्र सिंह ने पुलिस को नामजद तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि धर्मेंद्र को जान से मारने की नीयत से दीवार गिराई गई, जिसके नीचे दबने से उनकी मौत हुई। प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि तहरीर मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है
दीवार गिरने से मलबे में दबे ग्रामीण की मौत, जमीन को लेकर चल रहा था विवाद


