– बरेली से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने जांच की
– प्रारंभिक जांच में खून में होने वाले हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण के संकेत
कानपुर। कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरणों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। करीब 15 दिनों के भीतर चार काले हिरणों की मौत हो चुकी है। मौतों का सिलसिला थमने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर-बरेली के विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए बुलाया।
मंगलवार को बरेली से पहुंची तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने काले हिरणों के बाड़े का निरीक्षण किया और एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम भी किया। प्रारंभिक जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की बात सामने आई है। यह खून में परजीवी के कारण होने वाला संक्रमण है। हालांकि मौत की अंतिम वजह की पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। नमूने और विसरा जांच के लिए बरेली भेजे गए हैं।
चिड़ियाघर से सामने आई जानकारी के मुताबिक बीमार पड़ने वाले हिरण पहले सुस्त हो रहे हैं और उनका खाना कम हो जाता है। इसके बाद कुछ दिनों में उनकी हालत अचानक बिगड़ती है और वे चलते-चलते जमीन पर गिर जाते हैं। पिछले सप्ताह तीन हिरणों की मौत के बाद दो दिन पहले एक और नर काले हिरण ने दम तोड़ दिया।
चिड़ियाघर के एक बाड़े में 87 से अधिक काले हिरण रखे गए हैं। बड़ी संख्या में हिरणों के एक ही बाड़े में रहने के कारण संक्रमण फैलने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में मल की जांच के दौरान कुछ हिरणों में परजीवी यानी पेट के कीड़े भी पाए गए थे।
मौतों के बाद संक्रमण की रोकथाम के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने बाड़े में चूने और दवाओं का छिड़काव शुरू कराया है। आईवीआरआई विशेषज्ञों ने चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों को उपचार और दवाओं के संबंध में आवश्यक सलाह भी दी है।
चिड़ियाघर निदेशक डॉ. कन्हैया पटेल के अनुसार विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की बात सामने आई है। नमूनों की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हिरणों की मौत का वास्तविक कारण क्या है और संक्रमण को रोकने के लिए आगे किस प्रकार की चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाकी काले हिरणों को संक्रमण से बचाना और मौतों का सिलसिला रोकना है।


