कन्नौज,लखनऊ। उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सरकारी व्यवस्था में वीआईपी संस्कृति और भ्रष्टाचार को लेकर सख्त रुख जताया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं, इसलिए किसी व्यक्ति से अनावश्यक रूप से पैर छुआने जैसी परंपराओं को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार का लक्ष्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जिसमें सम्मान हो, लेकिन चापलूसी और वीआईपी संस्कृति नहीं।
असीम अरुण का भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान पहले भी चर्चा में रहा है। अगस्त 2026 में कन्नौज में आयोजित ‘भ्रष्टाचार नहीं स्वीकार’ कार्यक्रम में उन्होंने पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार खत्म करने और जनता की शिकायतों पर जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया था। कार्यक्रम में कन्नौज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पुलिस चौकियों में भ्रष्टाचार के आरोप भी उठाए थे।
असीम अरुण ने पहले समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली में भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर चिंता जताई थी। वर्ष 2022 में सामने आए उनके पत्र के अनुसार विभाग के 122 अधिकारियों में से 87 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें, जांच या मुकदमों से जुड़े मामले बताए गए थे। उन्होंने आंतरिक सतर्कता व्यवस्था मजबूत करने, भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए गोपनीय माध्यम बनाने और शिकायतों की त्वरित जांच की व्यवस्था का सुझाव दिया था।
मई 2026 में असीम अरुण ने कहा था कि योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में करीब 9 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने पुलिस विभाग में लगभग 2.25 लाख भर्तियां पारदर्शी तरीके से होने का भी दावा किया था। ये आंकड़े मंत्री द्वारा सरकार की भर्ती व्यवस्था के संदर्भ में बताए गए थे।
सितंबर 2026 में मंत्री ने कहा था कि जिस तरह सरकार ने अपराध के खिलाफ कार्रवाई की है, उसी तरह अब भ्रष्टाचार के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
मंत्री का संदेश साफ है,सरकारी पद जनता पर रौब दिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अपनी कार्यशैली में जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता देनी होगी।


