नोएडा। केंद्रीय कर्मचारी सहकारी जीएन समिति से जुड़े करीब तीन दशक पुराने आवासीय विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विवादित फ्लैटों के वास्तविक हकदारों की पहचान के लिए अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सक्सेना की अध्यक्षता में एक सदस्यीय स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
विवाद मुख्य रूप से फ्लैटों के मूल आवंटियों और बाद में इन संपत्तियों को खरीदने वाले लोगों के बीच अधिकार को लेकर है। मामले में यह सवाल भी उठा कि जिन लोगों ने बाद में फ्लैट खरीदे, उन्हें संपत्ति पर वैध अधिकार माना जाए या नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने जांच की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधीर सक्सेना को सौंपी है। समिति उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के दावों की जांच कर यह निर्धारित करेगी कि विवादित फ्लैटों पर वास्तविक अधिकार किसका है।
मामले में नोएडा प्रशासन की ओर से बाद में फ्लैट खरीदने वाले लोगों को मान्यता दिए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद विवाद और जटिल हो गया।
करीब 30 वर्ष पुराने इस आवासीय विवाद में बड़ी संख्या में फ्लैट और उनके दावेदार जुड़े हुए हैं। अलग-अलग पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद समिति अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखेगी।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित स्वतंत्र समिति से लंबे समय से चले आ रहे विवाद के तथ्य स्पष्ट होने और वास्तविक हकदारों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।


