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Saturday, October 3, 2026

बच्चों की आंखों में डर नहीं, सपने दिखें: डीएम डॉ. अंकुर लाठर की भावुक अपील

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– “बच्चे सिर्फ परिवार की जिम्मेदारी नहीं, पूरे समाज की अमानत हैं”
– पॉक्सो जागरूकता को लेकर डीएम ने जगाई संवेदना

– गांधी जयंती पर सुरक्षित बचपन का संकल्प, ‘गुड टच-बैड टच’ की जानकारी देने पर जोर

फर्रुखाबाद।
बचपन जिंदगी का वह दौर है, जहां मासूम आंखों में भविष्य के सपने पलते हैं और छोटी-सी बात भी बच्चे के मन पर गहरा असर छोड़ सकती है। ऐसे में बच्चों को भय, शोषण और अपराध से बचाना केवल कानून लागू करने वाली संस्थाओं का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। इसी संवेदनशील विषय को लेकर जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने जनपदवासियों से मार्मिक अपील करते हुए बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया है।

गांधी जयंती के अवसर पर पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत चलाए जा रहे विशेष जन-जागरूकता अभियान के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि हर बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह बिना डर अपनी बात कह सके और खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करे।

“बच्चे की चुप्पी को समझना भी हमारी जिम्मेदारी”

डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कई बार बच्चे किसी परेशानी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों को उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझना होगा।
उन्होंने बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ के बारे में जागरूक करने, उनकी बातों को गंभीरता से सुनने तथा किसी भी प्रकार के लैंगिक शोषण या उत्पीड़न की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की।
पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लैंगिक अपराधों से विशेष कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। कानून में लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न और बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री जैसे अपराधों के विरुद्ध कठोर प्रावधान हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की व्यवस्था भी की गई है।

एक शिकायत दबाना, एक मासूम की आवाज दबाना है

डीएम ने लोगों से अपील की कि किसी बच्चे के साथ अपराध की जानकारी मिलने पर मामले को छिपाने, दबाने अथवा समझौते का प्रयास करने के बजाय तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। बच्चे की पहचान और गरिमा की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनने का माहौल बनाया जाए। बच्चा यदि किसी व्यक्ति, स्थान या परिस्थिति को लेकर असहज महसूस कर रहा है तो उसकी बात को नजरअंदाज न किया जाए।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की इस अपील में प्रशासनिक संदेश के साथ सामाजिक संवेदना भी दिखाई दी। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती के अवसर पर हमें ऐसा समाज बनाने का संकल्प लेना चाहिए, जहां किसी बच्चे को डरकर जीना न पड़े और उसकी मासूमियत अपराधियों के निशाने पर न आए।उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि बच्चों के सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त भविष्य के लिए सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
“बच्चों को केवल पढ़ाना ही नहीं, उन्हें सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। उनके चेहरे की मुस्कान और आंखों के सपने सुरक्षित रहें,यही एक संवेदनशील समाज की पहचान है।”

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