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Saturday, October 3, 2026

पुलिया टूटने की शिकायत पर मौके पर पहुंचीं डीएम डॉ अंकुर लाठर

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– 46 साल बाद कोई जिम्मेदार पंहुचा जनता के घाव देखने
– ग्रामीण बोले—1980 से इसी रास्ते से खेतों तक पहुंच रहे हैं
– डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने खुद देखी मौके की स्थिति
– राजस्व अभिलेखों और नक्शे की जांच के दिए निर्देश एक-दो दिन में होगी पैमाइश

मोहम्मदाबाद, फर्रुखाबाद। तहसील समाधान दिवस में ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर शनिवार को स्वयं मौके पर पहुंच गयीं । ताजपुर रोड किनारे सरकारी पुलिया तोड़े जाने और खेतों की ओर जाने वाला रास्ता बंद होने की शिकायत पर डीएम ने मौके की स्थिति देखी और ग्रामीणों तथा संबंधित पक्ष से पूरे मामले की जानकारी ली।
डीएम के साथ एसडीएम सदर संजय कुमार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर टूटी पुलिया का निरीक्षण करने के साथ राजस्व अभिलेखों और नक्शे के आधार पर रास्ते की स्थिति की जानकारी जुटाई।
कस्बे के अवंतीबाई नगर निवासी रामदास, चरण सिंह, श्याम बिहारी, धर्मेंद्र सिंह समेत दर्जनों ग्रामीणों ने तहसील समाधान दिवस में शिकायत की थी कि एचएस कोल्ड स्टोरेज के मालिक वीरेंद्र पाल सिंह ने गाटा संख्या 7109 के पास सड़क किनारे बनी पुलिया को तोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिया टूटने से खेतों की ओर आने-जाने का रास्ता बाधित हो गया है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की बात सुनी और राजस्व अधिकारियों से रास्ते की वास्तविक स्थिति तथा अभिलेखों की जानकारी ली।
मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने डीएम के सामने अपना पक्ष रखा। एक सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों ने दावा किया कि वे वर्ष 1980 से इस रास्ते का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने पुराने रास्ते को बहाल कराने की मांग की।
दूसरी ओर खेत के मालिक वीरेंद्र पाल सिंह चंदेल निवासी करथिया ने अधिकारियों को बताया कि जमीन उनकी है और पुलिया भी उन्होंने अपनी निजी भट्ठे की ईंटों से अपने खेत तक आवागमन के लिए बनवाई थी। उनका कहना है कि मौके पर कोई सरकारी रास्ता नहीं है।
राजस्व अभिलेखों और नक्शे की प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने बताया कि गाटा संख्या 7109 के किनारे चकरोड दर्ज नहीं है। एसडीएम सदर संजय कुमार ने बताया कि चकबंदी के दौरान भी वहां चकरोड दर्ज नहीं था।
हालांकि ग्रामीणों के दावे और मौके की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मामले को तत्काल बंद करने के बजाय एक-दो दिन में मौके की पैमाइश कराने का निर्णय लिया है। एसडीएम ने कहा कि यदि ग्रामीण कोई ऐसा साक्ष्य अथवा अभिलेख प्रस्तुत करते हैं, जिसमें चकरोड दर्ज होना प्रमाणित होता है, तो उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद डीएम एचएस कोल्ड स्टोरेज पहुंचीं । यहां उन्होंने किसानों से बातचीत कर रखे गए आलू की जानकारी ली। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज से संबंधित निकासी रजिस्टर, अभिलेख, गेट पास, रसीद तथा आलू भंडारण पर मिलने वाले सरकारी किराया अनुदान के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
डीएम ने मौजूद किसान पंकज सिंह से भी आलू भंडारण के संबंध में पूछताछ की। उन्होंने चिप्स, सोना और न्यू हॉलैंड आलू में स्टार्च एवं मिठास से संबंधित जानकारी भी ली।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने कोल्ड स्टोरेज मालिक से यह भी पूछा कि यदि खेत किसान के नाम दर्ज है, लेकिन आलू उसके पुत्र या पत्नी के नाम रखा गया है, तो ऐसे मामलों में गेट पास, पर्ची और रसीद किस आधार पर जारी की जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सरकारी किराया अनुदान के लिए किसान से परिवार रजिस्टर की नकल अथवा राशन कार्ड की प्रति प्राप्त की जानी चाहिए, ताकि संबंधित किसान और परिवार के संबंध की पुष्टि की जा सके।
पुलिया और रास्ते को लेकर लंबे समय से चले आ रहे दावे-प्रतिदावे के बीच जिलाधिकारी का स्वयं मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की बात सुनना चर्चा का विषय रहा।

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