लखनऊ। लोकभवन में रविवार को आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग में चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं में निराशा थी और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते थे। उन्होंने कहा कि ग्रुप सी और डी की भर्तियों में साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त कर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया गया।
योगी ने कानून-व्यवस्था पर कहा कि आज अपराधी अपराध करने से पहले परिणाम के बारे में सोचता है। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में आए दिन दंगे और लंबे समय तक कर्फ्यू की स्थिति रहती थी, जबकि अब पुलिस व्यवस्था में बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के मॉडल की चर्चा दूसरे राज्यों में भी होती है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस की जमीन पर कथित माफिया कब्जे का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि फोरेंसिक संस्थान के लिए जमीन तलाशने के दौरान तत्कालीन डीजीपी ने बताया था कि पुलिस की जमीन पर माफिया का कब्जा है। उन्होंने कहा कि उस मामले में एफआईआर दर्ज हुई और आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया।
योगी ने कहा कि प्रदेश में पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की क्षमता बढ़कर 60 हजार हो गई है, जबकि महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 44 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने पुलिस बैरकों, पुलिस लाइनों और पीएसी की क्षमता में किए गए विस्तार का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने अगले छह महीनों में प्रदेश में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने की बात दोहराई। इससे पहले 19 सितंबर के कार्यक्रम में भी उन्होंने एक लाख नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी।


