भारत ने तेवर दिखाए तो अमेरिका के सामने भी खड़ी होंगी बड़ी मुश्किलें
नई दिल्ली/वाशिंगटन। रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया कानून लागू कर दिया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत रूस से तेल या गैस की नई खरीद करने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिल गया है। हालांकि कानून में भारत पर सीधे 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान नहीं है और अंतिम कानून के पाठ में भारत का नाम भी नहीं है। फिर भी रूसी तेल के बड़े खरीदार के तौर पर भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका बनी हुई है।
भारत ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लगाता है तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मामला अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी से भी जुड़ गया है। कानून के तहत उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है जो कानून लागू होने के 30 दिन बाद जानबूझकर रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और पिछले 12 महीनों में रूसी तेल-गैस के मात्रा के हिसाब से शीर्ष पांच आयातकों में शामिल रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार पर इसका असर बड़ा हो सकता है। 2025 में भारत से अमेरिका को करीब 103.8 अरब डॉलर का सामान निर्यात हुआ था। यदि भारतीय उत्पादों पर 100 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इसका असर अमेरिकी आयातकों और उपभोक्ताओं के साथ भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ सकता है। फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, कपड़ा और अन्य विनिर्मित सामान इसके दायरे में प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि भारत पर ऐसा शुल्क लगाना अमेरिका के लिए भी कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। रक्षा और तकनीकी सहयोग के साथ भारत में अमेरिकी कंपनियों का निवेश और विनिर्माण भी बढ़ रहा है। भारत से आयातित उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने से अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और उनकी आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा मोर्चे पर भी स्थिति जटिल हो सकती है। यदि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद अचानक कम करता है और खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने लगता है तो वैश्विक मांग और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अमेरिका समेत कई देशों में महंगाई का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के आंकड़े विशेषज्ञों के अनुमान हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि ट्रंप प्रशासन इस कानून का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किस तरह करता है। कानून ने 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार जरूर दिया है, लेकिन भारत पर कितना शुल्क लगाया जाएगा, कब लगाया जाएगा और किन उत्पादों पर लागू होगा, यह अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा। ऐसे में रूसी तेल खरीद का मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार और रणनीतिक रिश्तों के लिए आने वाले दिनों में अहम परीक्षा बन सकता है।


