एक सप्ताह से गांवों में भरा पानी, 75 फीसदी धान की फसल डूबी; 1985 से तटबंध की मांग का दावा
लखनऊ। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर ने इटौंजा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है। क्षेत्र के करीब आठ गांवों की लगभग 15 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। कई गांवों में पिछले एक सप्ताह से पानी भरा हुआ है, जिससे ग्रामीणों के सामने आवागमन, पशुओं के चारे और फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
बाढ़ के पानी से किसानों की करीब 75 प्रतिशत धान की फसल जलमग्न होने की जानकारी सामने आई है। खेतों में पानी भरने से धान के साथ अन्य फसलों और हरे चारे को भी नुकसान पहुंचा है। पशुपालकों को चारे के लिए दूर जाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर मवेशियों के बीमार होने की भी शिकायत सामने आई है।
प्रभावित गांवों में अकड़रिया कला, अकड़रिया खुर्द, दुघरा, हीरापुरवा, हरदा, जमखनवा, सुल्तानपुर और बहादुरपुर समेत आसपास के गांव शामिल हैं। जलभराव के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के आवागमन में भी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र को बाढ़ से स्थायी राहत दिलाने के लिए 1985 से तटबंध निर्माण की मांग की जा रही है। उनका आरोप है कि वर्षों से आश्वासन के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। हालिया बाढ़ के बीच एक बार फिर तटबंध निर्माण की मांग तेज हो गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राजस्व विभाग की टीमें जलमग्न फसलों का सर्वे कर रही हैं और किसानों से मुआवजे के लिए आवश्यक दस्तावेज लिए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर और नाव की व्यवस्था भी की गई है।


