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Saturday, July 11, 2026

फ्लिपकार्ट-मिंत्रा पर 3,000 करोड़ रुपये के कथित छूट खेल

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– प्रतिस्पर्धा आयोग में शिकायत; 33 चुनिंदा विक्रेताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने का दावा

नई दिल्ली। देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रमुख ऑनलाइन खरीदारी मंच फ्लिपकार्ट और उसकी फैशन इकाई मिंत्रा पर चुनिंदा विक्रेताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में फोरम फॉर इंटरनेट रिटेलर्स, सेलर्स एंड ट्रेडर्स (एफआईआरएसटी) ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में औपचारिक शिकायत दर्ज कर विस्तृत जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फ्लिपकार्ट ने लगभग 3,000 करोड़ रुपये का एक विशेष “सब्सिडी पूल” तैयार किया, जिसके माध्यम से केवल 33 चुनिंदा विक्रेताओं को भारी छूट उपलब्ध कराई गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस व्यवस्था से इन विक्रेताओं को अन्य ऑनलाइन विक्रेताओं की तुलना में अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला।

एफआईआरएसटी का आरोप है कि बड़े पैमाने पर दी गई इन छूटों के कारण छोटे और मध्यम ऑनलाइन विक्रेता समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सके। उनका कहना है कि ई-कॉमर्स मंच पर सभी विक्रेताओं के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन यदि कुछ चुनिंदा विक्रेताओं को विशेष आर्थिक सहायता देकर बाजार में बढ़त दिलाई जाती है, तो यह निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था के विपरीत है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कथित अनुदान व्यवस्था के माध्यम से उत्पादों पर असामान्य रूप से अधिक छूट दी गई, जिससे ग्राहकों का रुझान सीमित विक्रेताओं की ओर बढ़ा और अन्य विक्रेताओं के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। संगठन का दावा है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन प्रभावित हुआ और छोटे व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुंचा।

अब यह मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के समक्ष पहुंच गया है। आयोग शिकायत में लगाए गए आरोपों का परीक्षण करेगा और यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो विस्तृत जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। जांच के दौरान कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति, विक्रेता चयन प्रक्रिया, छूट व्यवस्था तथा प्रतिस्पर्धा संबंधी नियमों के पालन की समीक्षा की जा सकती है।

गौरतलब है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र में बड़ी छूट और चुनिंदा विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के आरोप पहले भी उठते रहे हैं। समय-समय पर पारंपरिक व्यापारिक संगठनों ने भी यह मुद्दा उठाया है कि ऑनलाइन मंचों पर कुछ विक्रेताओं को विशेष सुविधाएं देकर प्रतिस्पर्धा के समान अवसरों को प्रभावित किया जाता है।

हालांकि, इस मामले में अभी तक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। साथ ही, फ्लिपकार्ट और मिंत्रा की ओर से भी शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो ई-कॉमर्स क्षेत्र की व्यावसायिक नीतियों, छूट व्यवस्था और प्रतिस्पर्धा संबंधी नियमों को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल मामला जांच के प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एवं आयोग के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।

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