फर्रुखाबाद। शमशाबाद विकासखंड के समैचीपुर चितार गांव में गंगा का कटान अब तबाही का रूप ले चुका है। करीब 15 दिन से जारी कटान के बीच शनिवार को चार और पक्के मकान देखते ही देखते गंगा की धारा में समा गए। नदी की धार लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है। मकानों तक पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण दहशत में अपना गृहस्थी का सामान नाव और मोटर बोट के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।
कटान की चपेट में आसिफ, वारिस, शमशुल और जाफरीन के पक्के मकान आ गए। ग्रामीणों के सामने उनके वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए आशियाने गंगा की तेज धार में बह गए। मकान ढहने के बाद परिवारों में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग भी अपने घरों को लेकर चिंतित हैं। कटान की रफ्तार ऐसी है कि ग्रामीणों को अब आसपास के अन्य मकानों के भी गंगा में समाने का खतरा सताने लगा है।
गंगा की धार आबादी के बेहद करीब पहुंचने से गांव में भय का माहौल है। कई परिवार जरूरी सामान पहले ही सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। नाव और मोटर बोट के जरिए चारपाई, बर्तन, अनाज, कपड़े और अन्य घरेलू सामान निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई और परिवार बेघर हो सकते हैं।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए कायमगंज के उपजिलाधिकारी अभिषेक वर्मा ने एनडीआरएफ टीम को प्रभावित गांव में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। टीम को नावों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार गांव की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन ने बाढ़ और कटान से बेघर हुए परिवारों को दोबारा बसाने की तैयारी शुरू कर दी है। एसडीएम अभिषेक वर्मा के अनुसार प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए 14 बीघा जमीन चिह्नित की गई है। इसी जमीन पर जल्द ही प्रभावित परिवारों के लिए आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ में मकान गंवाने वाले परिवारों को हर हाल में दोबारा बसाया जाएगा।


