– ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति की मौजूदगी की पुष्टि
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर लंबे समय से जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। चीन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट में शामिल होंगे। चीन की ओर से यह घोषणा सम्मेलन के मुख्य कार्यक्रम से करीब 48 घंटे पहले की गई।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले 2019 में उन्होंने महाबलीपुरम में आयोजित अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। ऐसे में उनके नई दिल्ली दौरे को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
शी जिनपिंग के दौरे को लेकर कई दिनों से अटकलों का दौर चल रहा था। हालांकि चीन की ओर से लंबे समय तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। आखिरकार कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले बीजिंग ने उनकी मौजूदगी पर मुहर लगाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी के पीछे केवल यात्रा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं नहीं, बल्कि कूटनीतिक रणनीति भी हो सकती है। चीन अक्सर महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों को लेकर अंतिम समय तक अपने पत्ते खुले नहीं छोड़ता। इससे उसे बातचीत और कूटनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्थिति तय करने की अतिरिक्त गुंजाइश मिलती है।
चीन मामलों पर नजर रखने वाले रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जेएस सोढ़ी के अनुसार, चीन की कार्यशैली में इस तरह की रणनीतिक अस्पष्टता पहले भी देखने को मिली है। उनका मानना है कि चीन अपनी योजनाओं और इरादों को पूरी तरह पहले से सार्वजनिक करने से बचता है।
शी जिनपिंग का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद संवाद जारी है। सीमा विवाद और आपसी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की आमने-सामने मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स का मंच भारत और चीन दोनों के लिए बहुपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में शिखर सम्मेलन के दौरान आर्थिक सहयोग, वैश्विक दक्षिण, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चर्चा की संभावनाएं रहेंगी।
शी जिनपिंग के भारत आने की पुष्टि के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय मुलाकात होगी और यदि होती है तो दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होगी।
भारत के लिए यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ वह ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ संबंधों को लेकर भी कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में शी जिनपिंग की मौजूदगी सम्मेलन को केवल बहुपक्षीय मंच तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि भारत-चीन संबंधों की दिशा पर भी दुनिया की नजरें टिकेंगी।


