– सरकार के सख्त अभियान के बावजूद जमीनी स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे आपराधिक नेटवर्क
फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार भले ही माफिया, भू-माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का दावा कर रही हो, लेकिन कई क्षेत्रों से आ रही शिकायतें इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। लोगों का आरोप है कि बड़े अपराधियों पर कार्रवाई के बावजूद उनके नेटवर्क से जुड़े कुछ तत्व और कथित गुर्गे अभी भी प्रभाव और दबदबे के बल पर मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, धमकी, दबाव और प्रभाव के दुरुपयोग जैसी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही अपराध मुक्त प्रदेश बनाने की हो, लेकिन कुछ स्थानों पर कार्रवाई की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान माफियाओं की अरबों रुपये की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमे और आर्थिक नेटवर्क ध्वस्त करने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद यदि कहीं माफिया तंत्र से जुड़े लोग सक्रिय हैं तो यह प्रशासनिक निगरानी और स्थानीय स्तर की कार्रवाई पर सवाल खड़ा करता है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल बड़े चेहरों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। माफिया नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के लिए उसके आर्थिक, राजनीतिक और स्थानीय स्तर के सहयोगियों पर भी समान कठोरता से कार्रवाई आवश्यक है। जब तक जमीनी स्तर पर भयमुक्त वातावरण नहीं बनेगा, तब तक आम जनता खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जीरो टॉलरेंस नीति की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल बड़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि आम नागरिक को मिलने वाला सुरक्षा का एहसास है। यदि किसी क्षेत्र में लोग अभी भी दबाव, धमकी या प्रभावशाली तत्वों की मनमानी की शिकायत कर रहे हैं, तो संबंधित एजेंसियों को तत्काल संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए।
माफिया के खिलाफ बुलडोजर और बड़ी कार्रवाई की तस्वीरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब आम नागरिक बिना भय के अपना जीवन जी सके। यदि माफिया तंत्र के गुर्गे अब भी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है और जिम्मेदार तंत्र को इस पर कठोर कार्रवाई करनी होगी।


