लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था और सख्त करने का फैसला लिया है। प्रदेश में किसी भी प्रसूता की मौत होने पर अब 24 घंटे के भीतर ऑडिट किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
ऑडिट के दौरान प्रसूता की मौत के कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके बाद संबंधित जिले में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। जिन जिलों में मातृ मृत्यु के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, वहां विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले मातृ मृत्यु का ऑडिट सप्ताह में एक बार किया जाता था।
अमित कुमार घोष ने यह निर्देश केजीएमयू के कलाम सेंटर में आयोजित रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर कार्यक्रम की 10वीं वर्षगांठ पर हुई समीक्षा कार्यशाला में दिए। उन्होंने 28 नवनिर्मित स्वायत्त चिकित्सा महाविद्यालयों और सभी जिला महिला अस्पतालों के चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आरआरटीसी कार्यक्रम के तहत अब तक 1,791 चिकित्सकों को प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर मार्गदर्शन दिया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप पिछले एक दशक में प्रदेश की मातृ मृत्यु दर में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2016 में मातृ मृत्यु दर 197 प्रति एक लाख थी, जो 2026 में घटकर 154 प्रति एक लाख बताई गई है।


