फर्रुखाबाद। शमसाबाद विकासखंड के कटरी क्षेत्र में गंगा का कटान लगातार विकराल होता जा रहा है। समैचीपुर चितार गांव में बुधवार रात से गुरुवार शाम तक गंगा की तेज धार ने आठ मकानों को अपने आगोश में ले लिया। लगातार बढ़ते कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने एहतियातन करीब 50 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। गांव में कई परिवार रातभर जागकर अपने घरों और सामान की निगरानी करने को मजबूर हैं।
गंगा की धार में जेला, जाकिर, जहरुल, निशार, जहीरुद्दीन, सरवर, फुरकान और रफीक के मकान समा गए। ग्रामीणों का कहना है कि कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि लोगों को सामान समेटने तक का समय नहीं मिल पा रहा। रात में गंगा की तेज धार की आवाज से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। जिन घरों तक कटान पहुंच चुका है, वहां रहने वाले परिवारों को किसी भी समय सुरक्षित स्थान की ओर निकलने की चिंता सता रही है।
कायमगंज एसडीएम अभिषेक वर्मा के मुताबिक समैचीपुर चितार से अब तक करीब 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। कई परिवार रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कुछ ने शाहजहांपुर के इस्लामनगर गांव और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है। ग्रामीणों को निकालने के लिए नाव और मोटर बोट लगाई गई हैं। राजस्व कर्मी भी प्रभावित क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं।
उधर, शमसाबाद में शाहजहांपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर चौरा गांव के सामने करीब दो फीट पानी पहुंच गया है। तेज बहाव के बावजूद लोग आवागमन कर रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक बैलगाड़ियों का सहारा लेकर पानी पार कर रहे हैं। पानी के तेज बहाव के बीच इस तरह आवाजाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
गंगा के कटान की मार शिक्षा व्यवस्था तक पहुंच गई है। कटरी तौफीक में स्थित कंपोजिट विद्यालय का मुख्य भवन भी गंगा की धार में समा गया। अब विद्यालय में केवल एक बरामदा और अतिरिक्त कक्ष ही बचा है। कटान की रफ्तार को देखते हुए बचे हिस्से पर भी खतरा मंडरा रहा है। गंगा कई दिनों से विद्यालय के आसपास कटान कर रही थी।
कटान शुरू होते ही प्रधानाध्यापक इक्तियार अहमद और शिक्षकों ने विद्यालय के अभिलेख और जरूरी सामान सुरक्षित निकाल लिया था। प्रशासन ने प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को पड़ोसी गांव झौआ के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य कराने के निर्देश दिए हैं। अब यहां पढ़ने वाले बच्चों की कक्षाएं झौआ के विद्यालय में संचालित की जाएंगी। गंगा के लगातार बढ़ते कटान ने ग्रामीणों के सामने आशियाना बचाने के साथ बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।


