डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी का आरोप, मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज होगा केस; जेल में बंद आरोपियों से होगी पूछताछ
लखनऊ। अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच करेगा। मामले में ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगी और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है।
बताया जा रहा है कि लखनऊ पुलिस की जांच में सामने आए इस बड़े साइबर ठगी नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटाने के लिए ईडी ने लखनऊ पुलिस से पूरे मामले की जानकारी मांगी है। पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी के आधार पर ईडी आगे की कार्रवाई करेगी।
साइबर ठगी के इस नेटवर्क का खुलासा लखनऊ की समिट बिल्डिंग से हुआ था। जांच के दौरान अमेरिकी नागरिकों को फोन और अन्य डिजिटल माध्यमों से डराकर कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट करने और उनसे रकम वसूलने का मामला सामने आया था।
गिरोह पर बड़ी रकम की ठगी करने का आरोप है। पुलिस की कार्रवाई के बाद कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। अब ईडी इस पूरे मामले में ठगी से अर्जित रकम, उसके हस्तांतरण और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करेगी।
ईडी मामले में जेल में बंद आरोपियों से भी पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसी का फोकस ठगी की रकम के स्रोत, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ गिरोह से जुड़े लोगों और संपत्तियों पर भी रह सकता है।
पुलिस से केस की जानकारी मिलने के बाद ईडी पीएमएलए के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। इससे 100 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी के इस मामले की जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।


