यूपी के 26 जिलों में संकट,
पांच हजार स्कूल बंद
सैकड़ों श्मशान घाट डूबे
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून का असर अब भी गंभीर बना हुआ है। बिहार में गंगा, कोसी और गंडक समेत प्रमुख नदियों के उफान से 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। करीब 41.45 लाख लोग प्रभावित हैं और 517 पंचायतों में बाढ़ का पानी परेशानी का सबब बना हुआ है। पांच हजार से अधिक स्कूलों के पानी में डूबने के कारण उन्हें बंद करना पड़ा है। वहीं, नदियों के किनारे बने 500 से अधिक श्मशान घाट भी जलमग्न हैं, जिससे अंतिम संस्कार तक के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बिहार में कई इलाकों में पानी उतरने लगा है, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। पटना से मुंगेर तक गंगा का जलस्तर घटा है, जबकि भागलपुर के कहलगांव में जलस्तर चार सेंटीमीटर बढ़ गया। तिलकामांझी विश्वविद्यालय परिसर में गंगा का पानी घुसने से शिक्षक और छात्र नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। खगड़िया के ग्रामीण इलाकों में कई जगह कमर तक पानी भरा है और लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
यूपी के 26 जिले बाढ़ की चपेट में, आज 36 जिलों में बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ और बारिश ने मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। प्रदेश के 26 जिलों में करीब चार लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच गुरुवार को 36 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 22 जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बीते 24 घंटे में 32 जिलों में 2.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। एक जून से अब तक प्रदेश में 651.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, यानी मानसून की सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है।
बाढ़ का असर गांवों के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच गया है। बरेली में रामगंगा नदी के उफान में प्राचीन मंदिर के डूबने की खबर है। बाराबंकी में सरयू नदी का पानी कई घरों में घुस गया है और करीब 12 मकानों के डूबने की स्थिति बनी है। गोंडा में घाघरा नदी के उफान से करीब 30 गांवों की 25 हजार आबादी बाढ़ से घिर गई है। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव और दूसरे अस्थायी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उत्तराखंड में पहाड़ों से पत्थर गिरने से हाईवे बंद, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड में भी मौसम का मिजाज चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। नैनीताल, अल्मोड़ा और केदारघाटी समेत कई पहाड़ी क्षेत्रों में धुंध छाई हुई है। बागेश्वर के कपकोट रोड पर आरे के पास पहाड़ों से लगातार पत्थर गिरने के कारण हाईवे बंद हो गया। देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली और तेज बारिश का भी अलर्ट है।
एमपी में थमा तेज बारिश का दौर, राजस्थान में 11 सितंबर से फिर बारिश के आसार
मध्य प्रदेश में फिलहाल कोई सक्रिय मौसम प्रणाली नहीं होने के कारण तेज बारिश का दौर थम गया है। बुधवार को ज्यादातर हिस्सों में धूप रही और गुरुवार को भी तेज बारिश की संभावना कम है। इटारसी में हालांकि बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने से लोगों को परेशानी हुई। राजस्थान में भी फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है, लेकिन 11 सितंबर से बारिश का नया दौर शुरू होने का अनुमान है। शुक्रवार को पांच जिलों में तेज बारिश का यलो अलर्ट है, जबकि 12 और 13 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में बारिश की चेतावनी दी गई है।
मानसून के इस दौर में जहां कुछ राज्यों में बारिश कमजोर पड़ रही है, वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का उफान अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। खेतों में पानी भरने से फसलों पर संकट है, गांवों में आवागमन प्रभावित है और कई जगह लोगों के सामने पशुओं के चारे तथा रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने बाढ़ प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जलभराव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य, आवागमन और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।


