दधिकांधा की सैकडो बर्ष पुरानी परम्परा रही कायम
कन्नौज। धर्म और इतिहास की नगरी ने पुरानी परम्पराओं को कायम रखते हुए अपनी सुगध पूरी दुनिया मे विखेरी है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर नगर मे निकलने बाली दधिकाघो शोभा यात्रा की आज भी जीवन्त है। हालांकि थोडा स्वरूप बदल गया।
शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाने के बाद शनिवार को श्री राधेश्याम मंदिर विशुन पुर टीला से भव्य दधिकाघो शोभा यात्रा निकाली गयी जिसमे बाल कृष्ण को चांदी के सिहासन पर विराज मान कर नगर भ्रमण कराया गया।
चांदी के सिंहासन को भक्त अपने कन्धे पर उठाये हुए शंख ध्वनि और घन्टा घडियाल की ध्वनि के साथ कन्हैया लाल की जय जयकार कर रहे थे। हाथी घोडा पालकी जय कन्हैया लाल के स्वर भी गुंजायमान रहे। दधिकांधो शोभा यात्रा में प्रथम पूज्य गणेश के अलावा आधा दर्जन झांकियां लोगो के आर्कषण का केन्द्र रही। डीजे पर धार्मिक स्वर लहरिया पर युवा अपनी भक्ति में डूबकर नृत्य करते हुए चल रहे थे। जगह जगह सिंहासन रोक कर बाल कृष्ण पर पुष्प बर्षा कर आरती की गई।
यात्रा में भजनों पर शंकर पार्वती नृत्य करते चल रहे थे।
दधिकांधा शोभा यात्रा विशुनपुर टीला से उठकर मछली मण्डी, तालवारान, फर्श, बडा चौराहा ,नगर पालिका रोड, लाखन तिराहा, छोटा चौराहा, बालाय पुल, पकरिया टोला, हरीनगर हाजी गंज होते हुए बाबा अस्तल (तलैया पुलिस चौकी) पहुंची जहॉ शोभा यात्रा का समापन हुआ। दधि कांधा शोभायात्रा में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
यात्रा में राधे श्याम मंदिर के सर्वराकार भागवताचार्य ब्रजेश पाठक, अर्पण पाठक सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।


