लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी और भाजपा गठबंधन के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। निषाद पार्टी के चार विधायक अपने सोशल मीडिया खातों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरों को प्रमुखता दे रहे हैं, जबकि उनके प्रोफाइल पर निषाद पार्टी का नाम और झंडा नजर नहीं आ रहा। इसको लेकर पार्टी अध्यक्ष एवं मंत्री डॉ. संजय निषाद ने नाराजगी जताई है।
संजय निषाद ने कहा कि कुछ विधायकों को अपनी पार्टी का झंडा-बैनर लगाने में ही शर्म आती है और वे पार्टी की बैठकों में भी शामिल नहीं होते। ऐसे नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में दोबारा टिकट देने से पहले पार्टी को गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उनके निशाने पर मेंहदावल के अनिल कुमार त्रिपाठी, नौतनवा के ऋषि त्रिपाठी, खड्डा के विवेकानंद पांडेय और शाहगंज के रमेश सिंह हैं।
इन चारों विधायकों का राजनीतिक जुड़ाव पहले भाजपा से रहा है और 2022 में गठबंधन के तहत उन्होंने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। हालांकि विधायक अपनी सफाई में भाजपा और निषाद पार्टी को गठबंधन का हिस्सा बताते हुए दोनों दलों के कार्यक्रमों में शामिल होने की बात कह रहे हैं। अनिल त्रिपाठी और विवेकानंद पांडेय ने अपनी गाड़ियों पर दोनों दलों के झंडे होने की बात कही, जबकि ऋषि त्रिपाठी ने खुद को तकनीकी रूप से निषाद पार्टी का विधायक बताया।
वहीं, ज्ञानपुर से निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे का रुख पार्टी के प्रति अलग दिखाई देता है। 2022 से पहले भाजपा छोड़कर निषाद पार्टी में आए विपुल दुबे के सोशल मीडिया पर पार्टी की गतिविधियों और नेताओं को प्रमुखता दी गई है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर विधायकों की निष्ठा और संभावित टिकट को लेकर उठे सवालों ने सियासी चर्चा तेज कर दी है।


