फर्रुखाबाद। शासनादेश में साफ मनाही के बावजूद विभागीय अफसरों ने नियमों को दरकिनार कर आकांक्षात्मक विकासखंड राजेपुर में तैनात खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार जायसवाल को शमसाबाद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। 20 अगस्त को मुख्य विकास अधिकारी की ओर से जारी आदेश के बाद अब सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने आकांक्षात्मक विकासखंडों में तैनात बीडीओ को दूसरे ब्लॉक का अतिरिक्त प्रभार देने पर रोक लगा रखी है तो फिर यह आदेश किस आधार पर जारी किया गया।
तत्कालीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की ओर से जारी शासनादेश के बिंदु संख्या आठ में स्पष्ट निर्देश हैं कि आकांक्षात्मक विकासखंडों में तैनात खंड विकास अधिकारियों को किसी अन्य विकासखंड का अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। साथ ही ऐसे विकासखंडों में कार्मिकों की शत-प्रतिशत तैनाती सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद राजेपुर जैसे आकांक्षात्मक ब्लॉक के बीडीओ को शमसाबाद की जिम्मेदारी सौंपे जाने से शासनादेश के पालन पर ही सवालिया निशान लग गया है।
मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि इस समय राजेपुर क्षेत्र बाढ़ की चरम स्थिति से जूझ रहा है। गंगा के बढ़े जलस्तर के चलते क्षेत्र में लगातार प्रशासनिक गतिविधियां चल रही हैं और पूरा जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित राजेपुर क्षेत्र पर विशेष नजर बनाए हुए है। राहत, बचाव, प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने और जमीनी व्यवस्थाओं की निगरानी के बीच राजेपुर के बीडीओ को दूसरे विकासखंड का अतिरिक्त प्रभार सौंपना प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करता है। ऐसे समय में एक अधिकारी की जिम्मेदारी दो विकासखंडों में बांटने से राजेपुर में बाढ़ प्रबंधन और विकास योजनाओं की निगरानी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
खास बात यह है कि आकांक्षात्मक विकासखंडों में सरकार बेहतर प्रशासन, योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुंच और निरंतर निगरानी पर विशेष जोर देती है। ऐसे में बाढ़ जैसे संवेदनशील समय में राजेपुर के बीडीओ को दूसरे ब्लॉक की जिम्मेदारी दिया जाना शासन की मंशा के विपरीत नजर आ रहा है।
मामले में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। अब सवाल यह है कि शासनादेश की अनदेखी कर जारी किए गए इस आदेश पर उच्चाधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और अतिरिक्त प्रभार को लेकर स्थिति कब तक स्पष्ट होती है।


