बढ़ती संख्या से शहर में भारी यातायात समस्या पर जताई चिंता, अगली सुनवाई 10 सितंबर को
लखनऊ। राजधानी में तेजी से बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या शहर की यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रही है और राज्य सरकार इस गंभीर समस्या पर निष्क्रिय होकर नहीं बैठ सकती।
शहर में यातायात प्रबंधन से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि लखनऊ में करीब 80 हजार ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इनके लिए पर्याप्त निर्धारित पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण चौराहों और प्रमुख मार्गों के आसपास इनके जमावड़े से यातायात प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रत्येक सड़क की वाहनों को संभालने की एक निश्चित क्षमता होती है, लेकिन ई-रिक्शा की बड़ी संख्या के कारण लखनऊ में यह क्षमता प्रभावित हो रही है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि लगातार बढ़ रही ई-रिक्शा की बिक्री और उनके संचालन को नियंत्रित करने के लिए क्या नीति बनाई जा रही है तथा शहर के भीतर इनके आवागमन को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा। कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस के लिए अलग संवर्ग बनाने का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने कहा कि यातायात प्रबंधन का काम सामान्य पुलिस के कार्यों से अलग है और बढ़ते यातायात के मद्देनजर अलग यातायात पुलिस संवर्ग बनाने पर विचार करना जनहित में हो सकता है।
कोर्ट ने हाईकोर्ट परिसर के आसपास पॉलीटेक्निक से कमता चौराहे तक यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए चिन्हित 153 बिंदुओं पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की। लखनऊ नगर निगम की रिपोर्ट और कोर्ट द्वारा गठित समिति के प्रस्तावों पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने को कहा गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।


