हिंदुओं ने मौलानाओं का किया स्वागत
लखनऊ। ईद मिलादुन्नबी यानी बारावफात का पर्व बुधवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज और मुरादाबाद समेत कई शहरों में जुलूस निकाले गए। जुलूसों में धार्मिक झंडों के साथ भारतीय तिरंगा भी नजर आया।
लखनऊ के उदयगंज में बारावफात जुलूस के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली। हिंदू समाज की ओर से आचार्य पंडित कृष्ण चंद्र शुक्ल ने मौलाना महमूदुल हसन समेत मुस्लिम धर्मगुरुओं का माला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे से गले मिले। आचार्य ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है और सभी मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं।
वाराणसी में रेवड़ी तालाब से मदहे सहाबा का बड़ा जुलूस निकला। प्रशासन और आयोजन समिति की सहमति से इस बार 1,500 के बजाय केवल 100 वाहनों को जुलूस में शामिल होने की अनुमति दी गई। जुलूस में दो हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। कई वाहनों पर बच्चे धार्मिक परिधानों में नजर आए और लोगों के हाथों में तिरंगा भी रहा।
लखनऊ में अमीनाबाद के झंडे वाले पार्क से जुलूस-ए-मदहे सहाबा निकाला गया, जिसमें करीब 200 संगठनों के लोग शामिल हुए। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि जुलूस में तिरंगा देश के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
जुलूसों को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। लखनऊ में पश्चिमी क्षेत्र को पांच जोन और 23 सेक्टरों में बांटकर करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। वाराणसी में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा और वाहनों की जांच भी की गई।
प्रदेशभर में जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने धार्मिक संगठनों के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभाली।


