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Tuesday, May 26, 2026

शांति वार्ता के बीच फिर भड़का पश्चिम एशिया

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ईरान पर अमेरिकी हमले से बढ़ा महायुद्ध का खतरा

तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता के बीच दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को तनाव की आग में झोंक दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही ईरानी नौकाओं और मिसाइल लॉन्च साइटों को निशाना बनाकर कार्रवाई की गई है। इसके बाद बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।

हालांकि ईरान सरकार ने अब तक इस हमले की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है, लेकिन तेहरान की चुप्पी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने पलटवार किया तो अप्रैल से लागू नाजुक युद्धविराम पूरी तरह टूट सकता है और पश्चिम एशिया फिर बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस बीच बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने के लिए अमेरिका भेजने के बजाय किसी तीसरे स्वीकार्य देश में ट्रांसफर कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि यह प्रक्रिया सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पूरी कराई जाएगी। उनके बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।

उधर पाकिस्तान ने भी अमेरिका के प्रस्तावित अब्राहम समझौते से दूरी बना ली है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने साफ कहा कि इस्लामाबाद किसी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो उसकी विचारधारा के खिलाफ हो। पाकिस्तान के इस रुख और खाड़ी देशों की बढ़ती बेचैनी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त अभियान चलाकर ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, इस्राइल और खाड़ी क्षेत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर डाला था। बाद में पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता के बाद अप्रैल में युद्धविराम लागू हुआ था।

अब ताजा अमेरिकी हमले और बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने फिर से दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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