– करीब 15 फीसदी युवा मतदाता कई सीटों पर बदल सकते हैं चुनावी तस्वीर
– भाजपा-सपा समेत सभी दलों ने कसी कमर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों की नजर अब जेन-जी यानी युवा मतदाताओं पर टिक गई है। माना जा रहा है कि करीब 15 फीसदी युवा मतदाता आगामी चुनाव में कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। खासतौर पर जिन सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में जीत-हार का अंतर कम रहा था, वहां युवाओं का रुख चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश की 99 सीटों पर जीत और हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था। ऐसे में युवा वोटरों का मामूली झुकाव भी कई विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि भाजपा, सपा समेत विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
जेन-जी मतदाताओं के लिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, शिक्षा, महंगाई, सरकारी भर्तियां और डिजिटल अवसर जैसे मुद्दे अहम माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय यह वर्ग राजनीतिक दलों के प्रचार अभियान, नीतियों और नेताओं के बयानों पर भी तेजी से प्रतिक्रिया देता है।
राजनीतिक दल अब पारंपरिक जनसंपर्क के साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं से संवाद बढ़ाने की तैयारी में हैं। छात्र संगठनों, युवा कार्यकर्ताओं और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश तेज हो सकती है।
2027 के चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बड़ी संख्या में पहली बार मतदान करने वाले युवा भी चुनावी मैदान में होंगे। रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की नाराजगी या समर्थन सीधे तौर पर मतदान के रुझान में दिखाई दे सकता है।
भाजपा और सपा समेत अन्य दल युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं को लेकर अपने-अपने एजेंडे को मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले महीनों में युवाओं को साधने के लिए राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों और अभियानों में और तेजी आने की संभावना है।


