जेई के इशारे पर बिचौलिए ने शिकायतकर्ता से मंगवाए थे 70 हजार रुपये, दुकान ढहाने का भय दिखाकर लाखों की मांग
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के रिश्वतकांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरोप है कि 7.50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग से पहले भी शिकायतकर्ता से 70 हजार रुपये वसूले गए थे। विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि यह रकम जेई के इशारे पर बिचौलिए के माध्यम से मंगाई गई थी।
जांच के मुताबिक, जेई दिनेश वर्मा के कथित इशारे पर बिचौलिए श्रवण ने शिकायतकर्ता से 70 हजार रुपये मंगवाए थे। आरोप है कि शिकायतकर्ता की दुकान ढहाने का भय दिखाकर उससे लाखों रुपये की मांग की जा रही थी। इसी दौरान रिश्वत की रकम को लेकर बातचीत और लेनदेन हुआ।
विजिलेंस ने 2 अगस्त को कार्रवाई करते हुए मामले में जेई और सुपरवाइजर समेत आरोपियों को पकड़ा था। कार्रवाई के दौरान सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और बिचौलिए श्रवण को भी रंगे हाथ पकड़े जाने की बात सामने आई थी।
विजिलेंस की जांच में सामने आए बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य लेनदेन की डिटेल को अहम साक्ष्य माना जा रहा है। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की रकम किसके इशारे पर और किस माध्यम से ली गई।
विजिलेंस ने मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्यों को भी जुटाया है। अब जांच का फोकस कथित तौर पर पहले लिए गए 70 हजार रुपये और बाद में मांगी गई 7.50 लाख रुपये की रकम के बीच संबंध पर है।
मामले में सामने आए तथ्यों ने एलडीए में भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस रिश्वतकांड में कुल कितनी रकम की मांग और वसूली हुई तथा इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।


