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Saturday, August 8, 2026

गंगा उफान पर, नाव के सहारे जिंदगी: जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे मासूम

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खतरे के निशान के करीब गंगा का जलस्तर, छोटी नावों में क्षमता से अधिक सवारियां; ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप

कानपुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों के ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर छोटी-छोटी नावों के सहारे गंगा पार करनी पड़ रही है। क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर नावों का संचालन किया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि घारमखेड़ा, चैनपुरवा, पहाड़ीपुर समेत कई गांवों के लोग आवागमन के लिए पूरी तरह नावों पर निर्भर हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूली बच्चों की है, जिन्हें शिक्षा के लिए रोज गंगा पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में छोटे बच्चों तक को नाव से सफर करना पड़ रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई नावों में एक साथ दो दर्जन से अधिक लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जा रही है। गंगा का जलस्तर पहले से ही खतरे के निशान के करीब है, ऐसे में ओवरलोड नावों का संचालन गंभीर जोखिम पैदा कर रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच सुरक्षित आवागमन की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे हर दिन हादसे का डर बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों के लिए तत्काल सुरक्षित नावों की व्यवस्था, सुरक्षा जैकेट (लाइफ जैकेट), प्रशिक्षित नाविकों की तैनाती तथा आवश्यक होने पर वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ते जलस्तर के बीच कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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