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Wednesday, September 23, 2026

विधानसभा सचिवालय से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, आदेश का इंतजार

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय और विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे से जुड़े मामले में याचिका पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई हुई।
जानकारी के अनुसार मामले को मंगलवार को भी न्यायालय के समक्ष टेक-अप किया गया था। हालांकि, उस दिन सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और न्यायालय ने मामले को अगले दिन के लिए “पुट अप टुमॉरो” कर दिया था। इसके बाद बुधवार को मामले की सुनवाई हुई।
मामला विधानसभा सचिवालय में प्रमुख सचिव के पद पर प्रदीप कुमार दुबे के बने रहने तथा उनकी सेवा से संबंधित आदेशों को चुनौती देने से जुड़ा बताया जा रहा है। इससे पहले भी इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में टलती रही है। अगस्त 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनकी सेवानिवृत्ति के बाद पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका का उल्लेख किया गया था।
मामले में सेवा-नियमों, सेवानिवृत्ति और उसके बाद पद पर बने रहने से संबंधित दस्तावेजों तथा आदेशों की वैधानिकता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन सभी प्रश्नों पर अंतिम स्थिति न्यायालय के आदेश से ही स्पष्ट होगी।
बुधवार को सुनवाई होने के बाद देर शाम तक न्यायालय का विस्तृत आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सका था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक ई-लीगलिक्स व्यवस्था में न्यायालय के निर्णय और आदेश उपलब्ध कराए जाते हैं।
ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि न्यायालय ने मामले में क्या निर्देश दिए हैं। आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट ने याचिका पर क्या रुख अपनाया, संबंधित पक्षों को क्या निर्देश दिए और आगे की सुनवाई के लिए क्या दिशा तय की गई।
इस प्रकरण में विधानसभा सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई दस्तावेज चर्चा में रहे हैं। इनमें सेवानिवृत्ति आदेश, सेवा जारी रखने अथवा कार्यभार सौंपने से संबंधित आदेश और आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध कराई गई सूचनाएं शामिल हैं।
अब बुधवार की सुनवाई के बाद आने वाला न्यायालय का आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश में यदि सेवा-स्थिति अथवा संबंधित प्रशासनिक आदेशों पर कोई टिप्पणी या निर्देश दिए जाते हैं तो उससे पूरे मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और किसी भी पक्ष के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के आदेश के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।

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