– 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के समान लाभ मिलेंगे
– अयोध्या की तीन आवासीय योजनाओं को रद्द करने से अदालत का इनकार
लखनऊ। भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद अधिनियम, 1965 के प्रावधानों को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि प्रभावित भू-स्वामियों को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 के अनुरूप मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ दिए जाएंगे।
यह मामला अयोध्या की तीन आवासीय योजनाओं से संबंधित था, जिनकी वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने योजनाओं को निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 1965 का आवास विकास कानून प्रभावी बना रहेगा, जबकि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को मुआवजा, पुनर्वास और अन्य लाभ 2013 के कानून के अनुरूप उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस फैसले को प्रदेश में भूमि अधिग्रहण और आवासीय परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे एक ओर विकास परियोजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों के वैधानिक अधिकारों और उचित प्रतिकर को भी संरक्षण मिलेगा।


