अब एआई से बने कंटेंट पर लेबल अनिवार्य, गैरकानूनी सामग्री 3 घंटे में हटानी होगी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) और डीपफेक से जुड़े कंटेंट पर सख्ती बढ़ा दी है। नए प्रावधानों के तहत अब एआई की मदद से तैयार किए गए कंटेंट की स्पष्ट पहचान (लेबलिंग) करना अनिवार्य होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी मिल सके कि सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है।
सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक, भ्रामक वीडियो, फर्जी तस्वीरों और एआई -जनित सामग्री के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण करना है। इसके लिए सभी प्रमुख सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबल प्रदर्शित करना होगा।
नए नियमों के अनुसार, यदि किसी प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या प्रतिबंधित सामग्री की पहचान होती है, तो उसे हटाने की समय सीमा भी काफी कम कर दी गई है। पहले ऐसी सामग्री हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जबकि अब इसे घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों पर पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जी सूचनाओं पर अंकुश लगाना और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


