-लापरवाही की भेंट चढ़ रहीं फर्रुखाबाद की धरोहरें; संरक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति
मोहम्मद आकिब खांन
यूथ इंडिया, फर्रुखाबाद। विश्व धरोहर दिवस हमें उन ऐतिहासिक इमारतों की याद दिलाता है, जिन्होंने न केवल वक्त की मार झेली, बल्कि हमारे देश के संघर्ष, संस्कृति और स्वाभिमान को भी अपने भीतर संजोकर रखा है। जनपद की हर पुरानी इमारत, किला और धार्मिक स्थल एक जीवित दस्तावेज है, जहाँ इतिहास आज भी सांस लेता है। लेकिन कड़वा सच यह है कि उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का केंद्र रहा फर्रुखाबाद आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
जब हम इन धरोहरों के बीच खड़े होते हैं, तो एहसास होता है कि ये केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि उन वीरों की कहानी हैं जिन्होंने अपने बलिदान से इस देश को सींचा है। इन स्थानों ने अत्याचार देखे, संघर्ष झेला और फिर भी उम्मीद की लौ को जिंदा रखा। आज जरूरत इस बात की है कि हम इन स्थलों को केवल ‘पर्यटन स्थल’ न समझें, बल्कि इनके संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानें। अपनी विरासत को सहेजना ही सच्चा देशप्रेम है।
अंतिम सांसें गिन रही विरासत कहते हैं कि बुजुर्गों की यादें संजो कर रखना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है, और जो इसे नहीं निभा पाते, उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करता। हकीकत यह है कि जिम्मेदार विभाग केवल ‘बोर्ड’ लगाकर अपनी जिम्मेदारी भूल गए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से जनपद में क़रीब 15 स्थलों को संरक्षित तो किया गया है, लेकिन इनमें से अधिकतर का वास्तविक संरक्षण ब्रिटिश शासनकाल में ही हुआ था। आज इनके रखरखाव के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
जिला प्रशासन का केंद्र ‘कलेक्ट्रेट परिसर’, जहाँ से पूरे जिले की व्यवस्था तय होती है, वहीं की चारदीवारी के भीतर एक ऐतिहासिक धरोहर अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। हम बात कर रहे हैं सर्जन थॉमस हैमिल्टन के मकबरे की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित घोषित होने के बावजूद, यह मकबरा प्रशासनिक अनदेखी और विभागीय लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। हालाँकि, कुछ उम्मीद की किरणें भी दिखी हैं। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2021 में कार्यवाही शुरू कर 2023 में खुदागंज स्थित प्राचीन शिव मंदिर को संरक्षित घोषित किया है, जो एक सराहनीय कदम है।
एक नजर में: फर्रुखाबाद के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर (एएसआई) संरक्षित स्थल
जनपद की ऐतिहासिक समृद्धि का अंदाजा इन 15 प्रमुख स्थलों से लगाया जा सकता है, जो वर्तमान में उपेक्षा का शिकार हैं:
1. नवाब राशिद खान का मकबरा, मऊ रशीदाबाद
2. ऑल सोल्स मेमोरियल चर्च, फतेहगढ़
3. किले में स्थित कब्रिस्तान, फतेहगढ़
4. ब्रिटिश इन्फैंट्री लाइन्स स्थित कब्रिस्तान, फतेहगढ़
5. सर्जन थॉमस हैमिल्टन का मकबरा, फतेहगढ़
6. रानी विक्टोरिया मेमोरियल, फतेहगढ़
7. राजा द्रुपद का किला (ऐतिहासिक टीला), कंपिल
8. मेजर रॉबर्टसन का मकबरा, कड़हर
9. प्राचीन मस्जिद और सराय, खुदागंज
10. ऐतिहासिक पत्थर और घेरा, खुदागंज
11. नवाब मोहम्मद खान बंगश का मकबरा, फर्रुखाबाद
12. बौद्ध विहार (विस्तृत टीला), पखना विहार
13. विस्तृत टीला, पिलखना
14. प्राचीन टीला, संकिसा
15. करेवर या कंदायत ताल, संकिसा


