– ईंधन बचत के लिए जजों ने अपनाई कार-पूलिंग व्यवस्था, कर्मचारियों को सीमित WFH की अनुमति
शिमला। मिडिल ईस्ट संकट के चलते देशभर में ईंधन बचाने को लेकर विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पेट्रोल-डीजल की बचत के उद्देश्य से कार-पूलिंग और सीमित वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।
हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार यह निर्णय केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। रजिस्ट्रार जनरल भूपेश शर्मा द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि 12 मई 2026 को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग द्वारा जारी ऑफिस मेमोरेंडम और 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सर्कुलर के आधार पर यह कदम उठाया गया।
मुख्य न्यायाधीश Gurmeet Singh Sandhawalia ने ईंधन के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए इन उपायों को लागू करने के निर्देश दिए।
नई व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट के जज आपसी सहमति से कार-पूलिंग करेंगे, जिससे अनावश्यक वाहन उपयोग और ईंधन खपत को कम किया जा सके। वहीं हाईकोर्ट रजिस्ट्री की प्रत्येक शाखा या सेक्शन में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि शेष कर्मचारियों की कार्यालय में उपस्थिति अनिवार्य होगी ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को हर समय फोन पर उपलब्ध रहने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्यालय पहुंचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
देश में बढ़ती ईंधन चिंता और अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच हिमाचल हाईकोर्ट का यह कदम प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।


