जौनपुर। मछलीशहर विधानसभा की राजनीति इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में स्वयं को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता बताने वाले बबलू यादव ने विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और उनके जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) लखन सोनकर पर उपेक्षा, प्रताड़ना तथा अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इस वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है।
वीडियो में बबलू यादव का दावा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान पोस्टर लगाने, नारेबाजी करने और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन चुनाव के बाद उन्हें उपेक्षित कर दिया गया। उनका आरोप है कि उनकी भूमि से जुड़े मामले में भी उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
वायरल वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि विधायक डा. रागिनी सोनकर के जनसंपर्क अधिकारी लखन सोनकर का व्यवहार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के प्रति उचित नहीं है। बबलू यादव का आरोप है कि न तो कार्यकर्ताओं के फोन उठाए जाते हैं और न ही पत्रकारों को सम्मानजनक जवाब मिलता है। वीडियो में कुछ कथित चैट और बातचीत का भी उल्लेख किया गया है, यह भी कहा गया है कि गत रविवार को विधायक के जन संवाद में भी नंदियाव स्थित विधायक आवास पर पीआरओ द्वारा मुझे बेइज्जत किया गया और भगा दिया गया। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन यह बात सत प्रतिशत सच है कि विधायक कभी फोन नहीं उठाती। और कभी पीआरओ ने उठाया तो उलल जुलूल प्रश्न पूछने लगता है। ऐसा तो मुख्यमंत्री का भी पीए नहीं करता होगा।
सपा नेता बबलू यादव ने वीडियो में यह भी कहा कि क्षेत्र के यादव समाज में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है और समाज की बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर कार्यकर्ताओं की अपेक्षा यादव समाज के प्रभावशाली लोगों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक कथित फोन वार्ता और चैट का भी जिक्र है, जिसमें कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया गया है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बबलू यादव ने स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन से गुहार लगाने की बात कही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और उनके सहयोगियों से अपेक्षा रहती है कि वे कार्यकर्ताओं, आम नागरिकों और मीडिया के साथ संवाद बनाए रखें। यदि कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना पनपती है तो उसका असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी उतना ही आवश्यक है।


