चेन्नई। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। टीवीके प्रमुख विजय अभी भी बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे चल रहे हैं, जिसके चलते राजभवन की ओर से उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला है। राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कांग्रेस ने राज्यपाल पर देरी का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जबकि विभिन्न दलों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास फिलहाल 112 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। ऐसे में एक विधायक का समर्थन भी सत्ता की तस्वीर बदल सकता है। इसी वजह से चेन्नई की राजनीति में दिनभर बैठकों और जोड़तोड़ का दौर जारी रहा।
डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि विजय को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते अकेले सरकार बनाने का दावा करना चाहिए था। उनका कहना है कि गठबंधन के साथ दावा पेश करने के कारण अब राज्यपाल पूर्ण बहुमत का इंतजार कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता समीकरण प्रभावित करने की कोशिश कर रही है और कांग्रेस किसी भी कीमत पर भाजपा को सत्ता से दूर रखना चाहती है।
राजनीतिक हलचल के बीच टीवीके ने वीसीके से समर्थन मांगा है। टीवीके नेताओं का कहना है कि दोनों दल सामाजिक न्याय और अंबेडकरवादी विचारधारा में विश्वास रखते हैं, इसलिए साथ आने पर मजबूत गठबंधन बन सकता है। दूसरी ओर वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाकर समर्थन पर चर्चा शुरू कर दी है।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर संवैधानिक प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया है। चेन्नई, मदुरै और कोयंबटूर समेत कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर कहा कि सरकार गठन में देरी से विधायकों की खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ रहा है।
उधर राजनीतिक संकट के बीच चेन्नई स्थित लोक भवन और वीसीके कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं टीटीवी दिनाकरन ने टीवीके पर फर्जी समर्थन पत्र सौंपने का आरोप लगाकर सियासी विवाद को और गर्मा दिया है।


