कलामों और रूहानी माहौल के बीच सजा कव्वाली का दरबार
-अजमेरी ब्रदर्स की कव्वाली पर झूमे अकीदतमंद, जमकर बरसे नोट
मोहम्मद आकिब खां
यूथ इंडिया, कायमगंज/फर्रुखाबाद:
क़स्बा कायमगंज के गाँव कुबेरपुर में हज़रत फ़तेह मुहम्मद ख़ान उर्फ़ डब्बा शाह मियां रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार-ए-अक़दस पर मुनक़्क़िद सालाना उर्स-ए-पाक इस बार भी अपनी शायरी और रूहानियत के साथ हज़ारों दिलों को मुनव्वर कर गया। यह सह-रोज़ा उर्स 17 अक्टूबर को ‘क़ुल शरीफ़’ की मुक़द्दस रस्म के साथ इख़्तिताम पज़ीर हुआ, जिसमें मुल्क़ के मुख्तलिफ़ हिस्सों से आए हज़ारों ज़ाएरीन ने शिर्कत फ़रमाई।
उर्स का सबसे अहम मरकज़ ‘महफ़िल-ए-कव्वाली’ रही, जिसमें हिंदुस्तान के जाने-माने कव्वाल अजमेरी ब्रदर्स यानी फ़ैज़ान अजमेरी और फ़राज़ अजमेरी की जोड़ी ने अपनी शानदार पेशक़श से समां बाँध दिया। उनके सूफ़ियाना कलामों और ग़ज़लों पर श्रोताओं का इज्तिमा जज़्बाती हो उठा। कव्वालों की ईमान-अफ़रोज़ तर्ज़ से मुतास्सिर होकर अक़ीदतमंदों ने ख़ुशी में ‘नज़राना-ए-अक़ीदत’ के तौर पर नोटों की ख़ूब बरसात की, जिससे उर्स की शान-ओ-शौक़त में इज़ाफ़ा हुआ। कव्वाली का यह सिलसिला सुबह की अज़ान तक जारी रहा। इस महफ़िल में अजमेरी ब्रदर्स के अलावा बरेली की क़हकशां और शमशाबाद के मतलूब मंसूर नियाज़ी ने भी अपने ख़ूबसूरत अंदाज़ और सूफ़ी मौसीक़ी से हाज़िरीन का दिल जीत लिया।
महफ़िल-ए-मिलाद से कव्वाली तक तीन दिन रूहानी ख़ुशी छाई रही। सालाना उर्स का आग़ाज़ 15 अक्टूबर को ‘महफ़िल-ए-मिलाद’ से हुआ था। इसके बाद 16 अक्टूबर को ‘ग़ारिफ़ शरीफ़’ की रस्म अदा की गई, जिसके तुरंत बाद महफ़िल-ए-कव्वाली का एहतिमाम हुआ। उर्स के आख़िरी रोज़ यानी 17 अक्टूबर को ‘क़ुल की फ़ातिहा’ हुई और तबर्रुक़ तक़्सीम किया गया, जिसके साथ ही यह मुक़द्दस मज़हबी इज़्तिमा अक़ीदत के साथ संपन्न हुआ।
इस मौक़े पर सीनियर कांग्रेस लीडर आफ़ताब ख़ान, यूथ कांग्रेस लीडर और ज़िला पंचायत के उम्मीदवार जुनैद मम्मा, लईक ख़ान, समी ख़ान, रहबर ख़ान, आजम खां आदि ने मौजूदगी दर्ज कराई। वहीं, उर्स के हुस्न-ए-इंतज़ाम और व्यवस्था को संभालने में यासीन ख़ाँ, गुड्डू ख़ाँ, नज़म ख़ाँ, अली यासर ख़ाँ, बाबू ख़ाँ, माबूद ख़ाँ, चमन खां और जावेद खां जैसे जिम्मेदारान ने अपना क़ीमती तआवुन पेश किया।


