– 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त, लंबित उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से शासन ने लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में चकबंदी आयुक्त डॉ. हरीकेश भास्कर यशोद ने प्रदेश के चकबंदी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत निर्विवाद उत्तराधिकार एवं नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
जारी प्रेस नोट के अनुसार, चकबंदी प्रक्रिया में लंबे समय से लंबित गांवों के मामलों की समीक्षा की गई है। विभिन्न कारणों से चकबंदी का कार्य आगे नहीं बढ़ पाने वाले गांवों को नियमानुसार प्रक्रिया से अलग करने और जहां संभव हो, चकबंदी पूरी करने की कार्रवाई की गई है।
दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त की गई है। इनमें कुछ गांव ऐसे हैं, जहां चकबंदी का कार्य कई वर्षों से लंबित था। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए कुछ गांवों को चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत प्रक्रिया से पृथक किया गया, जबकि अन्य गांवों में धारा 52(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया पूरी की गई।
प्रेस नोट में महाराजगंज के बैसार गांव में 18 वर्षों से, बुलंदशहर के भीकमपुर गांव में 12 वर्षों से तथा चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में लंबे समय से लंबित चकबंदी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त बस्ती के औराडीहा और प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है।
चकबंदी आयुक्त ने प्रदेश के सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 के बीच विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार एवं नामांतरण के मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि से लंबित मामलों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाए। अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि ऐसे मामले लंबित रहते हैं, तो उनकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित करने को भी कहा गया है।
इसके अलावा सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को अपने अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों तथा कार्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। चकबंदी अभिलेखों के रखरखाव और उनकी स्थिति की जांच कर निरीक्षण टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
चकबंदी प्रक्रिया में देरी और राजस्व अभिलेखों से जुड़े लंबित मामलों के कारण किसानों को कई बार अपने अधिकारों के निर्धारण और भूमि संबंधी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण होने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
शासन के निर्देशों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने और चकबंदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने पर ध्यान देना होगा।


