– सभी चिकित्सा संस्थानों में बनेगा विशेष सेल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में सामने आए कथित धर्मांतरण मामलों के बाद प्रदेश सरकार और राजभवन ने सख्त रुख अपनाया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देश पर प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में धर्मांतरण संबंधी शिकायतों की निगरानी और रोकथाम के लिए विशेष सेल गठित किए जाने का निर्णय लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार यह फैसला लखनऊ स्थित (केजीएमयू) और (एसजीपीजीआई) में सामने आए कथित धर्मांतरण से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने के बाद किया गया है। इन घटनाओं ने चिकित्सा और शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
प्रस्तावित विशेष सेल का उद्देश्य संस्थानों में किसी भी प्रकार की शिकायत, दबाव, प्रलोभन या कथित धर्मांतरण गतिविधियों की सूचना पर त्वरित संज्ञान लेना और संबंधित मामलों की निगरानी करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
राजभवन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चिकित्सा संस्थान शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र हैं, इसलिए वहां का वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक और निष्पक्ष बना रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की विवादित गतिविधि को लेकर प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की पहल बता रहा है, जबकि विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
प्रदेश सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। यदि किसी संस्थान में शिकायत प्राप्त होती है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्थान में छात्रों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और शैक्षणिक वातावरण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में विशेष सेल की प्रभावशीलता उसके कामकाज और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी।
फिलहाल राजभवन के इस निर्णय को उत्तर प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


