फर्रुखाबाद: शिक्षा विभाग (education department) में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पुत्र और ट्रिपल आईआईटी मणिपुर (Triple IIT Manipur) के छात्र हर्षवर्धन (23) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। घटना 25 नवंबर की तड़के 3:20 बजे की है, जब छात्र के परिजन उसे लोहिया अस्पताल फ़र्रुखाबाद लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक छात्र हर्षवर्धन के पिता राजेश वर्मा, जो पूर्व में बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय फतेहगढ़ में डीसी दिव्यांग के पद पर तैनात रहे हैं, कई गंभीर अनियमितताओं में घिरे रहे हैं। आरोप है कि बच्चों के टूर के नाम पर बड़े स्तर पर घोटाले, वित्तीय अनियमितताएँ और रंगीनमिज़ाजी की कई शिकायतों पर विभागीय जांचे भी चलीं। खुद को फंसता देख उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी।
राजेश वर्मा की पत्नी—जो कि एक शिक्षिका थीं—की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पत्नी की मौत के बाद राजेश वर्मा को मृतक आश्रित कोटे में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी शाहजहांपुर में मिली है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि अस्पताल प्रशासन ने BHT नंबर 4214 के तहत मृत्यु की अनिवार्य पुलिस सूचना तक नहीं दी।
यह मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी और मेडिकल नियमों के अनुसार पुलिस को सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन लापरवाहीवश ऐसा नहीं किया गया। सूत्र बताते हैं कि राजेश वर्मा ने अपने प्रभाव और ‘हुनर’ के चलते इस मौत की खबर को स्थानीय अखबारों में प्रकाशित होने से भी रोक दिया, जिससे पूरे प्रकरण पर और भी संदेह बढ़ गया है।
ट्रिपल आईआईटी मणिपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के छात्र की अचानक और संदिग्ध मौत पर न परिजन खुलकर सामने आ रहे हैं और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी हुआ है। अस्पताल रिकॉर्ड में हत्या, आत्महत्या या दुर्घटना — किसी भी कोण से स्पष्ट जानकारी दर्ज नहीं की गई है। स्थानीय लोग और विभागीय सूत्र इस बात को लेकर हैरान हैं कि इतनी बड़ी घटना को किस तरह शांतिपूर्वक दबा दिया गया।


