– पहले मां-बाप, अब दादी भी छोड़ गईं साथ, छह बहनों पर टूटा दुखों का पहाड़
– 14 साल की अंजली के कंधों पर पांच बहनों की जिम्मेदारी, जर्जर कच्चे घर में भविष्य की चिंता
जालौन। कभी जिस घर में छह बहनों की मासूम हंसी गूंजती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है। एक-एक कर परिवार के तीन सहारे उनसे छिन गए। पहले पिता की मौत हुई, फिर मां ने भी दुनिया छोड़ दी और अब दादी का साया भी सिर से उठ गया। महज 14 साल की अंजली के सामने अब अपनी पांच छोटी बहनों को संभालने की जिम्मेदारी आ खड़ी हुई है। पेट भरने से लेकर सिर पर छत तक, हर चिंता इन मासूम बच्चियों के सामने खड़ी है।
ग्राम सींगपुरा निवासी विजय सिंह बरार मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। वर्ष 2023 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। पीछे छह बेटियां रह गईं। इनमें अंजली (14), दिव्या (12), प्रतिज्ञा (10), शिवानी (8) समेत दो छोटी बहनें हैं। पिता की मौत के बाद मां रामसिया ने बेटियों को संभालने की कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। करीब एक माह बाद मां का भी निधन हो गया। माता-पिता के जाने के बाद दादी ने बच्चियों को अपने आंचल में समेट लिया। उम्र के इस पड़ाव पर भी दादी ने किसी तरह छहों बहनों का पालन-पोषण किया। बच्चियों को उम्मीद थी कि दादी का साथ बना रहेगा, लेकिन रविवार को उनका भी निधन हो गया। दादी के जाने के साथ ही बच्चियों के सिर से आखिरी सहारे का साया भी उठ गया।
‘अब हम छह बहनें ही रह गई हैं… कौन संभालेगा?’ अंजली की यह बात सुनकर हर किसी का दिल भर आता है। वह कहती है कि घर में अब कोई बड़ा नहीं बचा है। वह अपनी बहनों को कैसे पालेगी, यही चिंता उसे दिन-रात सताती है। पढ़ने-लिखने की उम्र में अंजली के सामने परिवार चलाने की मजबूरी खड़ी हो गई है।
जिस कच्चे मकान में परिवार रहता है, वह भी बारिश के बाद जर्जर हो चुका है। न सुरक्षित छत है और न ही परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति जो इन बच्चियों का सहारा बन सके। छहों बहनों के सामने अब रोटी, कपड़ा, पढ़ाई और सुरक्षित आशियाने का संकट है। मासूम बच्चियों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्हें उम्मीद है कि कोई उनके सिर पर हाथ रखेगा, उनकी पढ़ाई और भरण-पोषण की जिम्मेदारी संभालने में मदद करेगा और उन्हें एक सुरक्षित छत मिल सकेगी। अब इन छह बहनों की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं।


