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Monday, April 20, 2026

भीषण गर्मी में बढ़े अग्निकांड का खतरा, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

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फर्रुखाबाद

जनपद में ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के साथ ही आग लगने की घटनाओं में तेजी आने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में आग लगने की घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं, जिससे न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है बल्कि जन-धन की हानि का भी खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, फर्रुखाबाद, अरूण कुमार सिंह ने आमजन से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष जलाना आग की बड़ी वजह बनता है, इसलिए इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। तेज हवाओं के दौरान चूल्हे या भट्ठी का उपयोग करने से भी आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही जलती हुई माचिस, बीड़ी या सिगरेट को इधर-उधर फेंकना भी खतरनाक साबित हो सकता है। खाना बनाते समय ढीले या पॉलिस्टर के कपड़े पहनने से आग पकड़ने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि घरों में गैस सिलेंडर और ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित दूरी पर रखा जाए तथा बिजली के उपकरणों जैसे पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज आदि की नियमित जांच कराई जाए। एमसीबी (MCB) लगवाना भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए ताकि शॉर्ट सर्किट से होने वाली आग की घटनाओं को रोका जा सके। बच्चों की पहुंच से माचिस, पटाखे और अन्य खतरनाक वस्तुएं दूर रखने की भी हिदायत दी गई है।
सार्वजनिक स्थलों, ट्रेनों और बसों में ज्वलनशील पदार्थ ले जाने पर भी रोक लगाने की अपील की गई है। किसी भी भवन में आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय निकटतम सुरक्षित निकास मार्ग का उपयोग करने, सीढ़ियों और गलियारों को अवरुद्ध न रखने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई व्यक्ति पीछे न छूटे। यदि कपड़ों में आग लग जाए तो “स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल” तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। धुएं से बचाव के लिए नीचे झुककर चलने और मुंह को गीले कपड़े से ढकने को भी कारगर बताया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि ट्रांसफार्मर के आसपास कम से कम तीन मीटर क्षेत्र तक फसल की कटाई समय से पहले कर ली जाए, जिससे आग फैलने की संभावना कम हो सके। आग लगने की किसी भी घटना में तुरंत पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचित करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है। पेट्रोलियम पदार्थों से लगी आग को बुझाने के लिए पानी के बजाय बालू या फायर एक्सटिंग्विशर का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
जिला प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं के टोल फ्री नंबर—102 और 108 (स्वास्थ्य सेवा), 112 (पुलिस), 101 (अग्निशमन) तथा 1077 (आपदा प्रबंधन) को याद रखने की अपील की है। इसके अतिरिक्त जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और फायर स्टेशन फतेहगढ़ के दूरभाष नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त की जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की जागरूकता और सहयोग से ही अग्निकांड जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। सभी से अपील की गई है कि इन सावधानियों का पालन करते हुए स्वयं भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी जागरूक करें। जनहित में जारी इस एडवाइजरी को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, ताकि भीषण गर्मी के इस मौसम में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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