नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 रविवार को अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। पेपर लीक विवाद के चलते पूर्व में रद्द की गई परीक्षा के बाद आयोजित पुनर्परीक्षा में देश और विदेश के 5,454 परीक्षा केंद्रों पर 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा के सफल आयोजन के साथ ही लाखों छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना अब ओएमआर शीट में कैद हो गया है और सभी की निगाहें परिणाम पर टिक गई हैं।
पिछली परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के सामने परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। इसी को देखते हुए इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए। परीक्षा केंद्रों पर त्रिस्तरीय जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी तथा 53 हजार से ज्यादा जैमर लगाए गए। प्रश्नपत्रों और ओएमआर शीटों के सुरक्षित परिवहन में भारतीय वायु सेना और भारतीय डाक विभाग की भी सहायता ली गई।
देश के 551 शहरों के 5,440 केंद्रों तथा विदेशों के 14 शहरों में परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 भारतीय भाषाओं में कराई गई। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहली बार 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया, जिससे परीक्षार्थियों को कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में राहत मिली।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान स्वयं एनटीए मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से परीक्षा की निगरानी करते रहे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए दिल्ली हवाई अड्डे पर लगभग 45 मिनट अतिरिक्त समय बिताया, ताकि उनके काफिले के कारण परीक्षा केंद्रों की ओर जाने वाले छात्रों को यातायात संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।
नीट-यूजी 2026 के शांतिपूर्ण आयोजन को शिक्षा मंत्रालय और एनटीए के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब परीक्षा की फोरेंसिक समीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा और लाखों अभ्यर्थियों को परिणाम का इंतजार रहेगा, जो उनके मेडिकल करियर की दिशा तय करेगा।


