– बीजेपी नेताओं के संरक्षण मे आवास विकास के निकट बीजेपी नेताओं के संरक्षण मे चल रहा अबैध प्लॉटिंग का खेल
– 9 गेस्ट हाउस और 9 होटल और 9 अवैध प्लॉटिंगकर्ताओं को नोटिस
– सिटी मजिस्ट्रेट पारुल तराल की बड़ी कार्यवाही , मची खलबली
– सरकारी तालाब पाटकर बसाई जा रही अबैध कालोनी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
– बुलडोजर की आहट से मची खलबली
फर्रुखाबाद। नियम-कानूनों को धता बताकर विनियमित क्षेत्र में खड़े किए गए अवैध निर्माणों और प्लॉटिंग कारोबार पर अब प्रशासन का शिकंजा जिलाधिकारी डॉ अंकुर लाठर की टेड़ी नजर होने के बाद कसना शुरू हो गया है। आवास विकास कॉलोनी से सटे नेकपुर कला क्षेत्र में सरकारी तालाब की भूमि पर कब्जा कर कुख्यात तेल माफिया और सिण्डिकेट द्वारा की जा रही अवैध प्लॉटिंग और नगर मे बिना स्वीकृत मानचित्र संचालित हो रहे गेस्ट हाउस प्रशासन की रडार पर आ गए हैं। प्रशासन द्वारा अब तक 9 गेस्ट हाउस, 9 नियम विरुद्ध संचालित गेस्ट हाउस तथा 9 अवैध प्लॉटिंगकर्ताओं को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार नेकपुर कला में भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह राठौर एवं शंकर सिंह के संरक्षण में तेल कारोबारी पवन उर्फ पंकज कटियार द्वारा सरकारी तालाब की भूमि पाटकर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग किए जाने की शिकायतें लंबे समय से उठ रही थीं। पूर्व मे तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट रहे संजय वंसल नें यहाँ पहुंच बुलडोजर भी चलवाया था, बाद मे प्लॉटिंग कर रहे तेल माफिया पवन कटियार नें अंदरखाने यें प्लॉटिंग बीजेपी नेता वीरेंद्र सिंह राठौर के सिंडिकेट को सौंप दी थी,जिसके बाद सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य शंकर सिंह को एक भूखंड भी मकान बनाने को दिया गया बिना ले नक्सा पास बने इस मकान को भी नोटिस जारी हुआ है,आरोप है कि बिना ले-आउट स्वीकृति के भूखंडों की बिक्री कर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है । अब विनियमित क्षेत्र की कार्रवाई के बाद ऐसे कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि कई गेस्ट हाउसों का निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृति के किया गया, जबकि कुछ गेस्ट हाउसों ने मानचित्र तो स्वीकृत कराया लेकिन निर्माण और संचालन स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया। यह स्थिति उत्तर प्रदेश निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम, 1958 के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आती है।
कार्रवाई की जद में आए प्रतिष्ठानों में रामप्यारी गेस्ट हाउस, जीआरडी गेस्ट हाउस सहित कई अन्य प्रतिष्ठान शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।


