आगरा। सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाली युवतियों को झांसे में लेकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी का बड़ा खेल सामने आया है। खुद को पीसीएस अधिकारी बताकर युवतियों का विश्वास जीतने वाले आरोपी ने नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवती से करीब 10 लाख रुपये और महंगा मोबाइल फोन हड़प लिया। मामले का खुलासा होने के बाद ट्रांस यमुना थाने में आरोपी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी सचिन खुद को प्रभावशाली अधिकारी बताकर युवतियों से संपर्क करता था। वह सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पीड़िता को भी आरोपी ने सरकारी नौकरी का सपना दिखाया और चयन प्रक्रिया में मदद करने का दावा किया। विश्वास में लेने के लिए उसने दो बार फर्जी नियुक्ति पत्र तक भेज दिए।
जब नियुक्ति नहीं हुई तो आरोपी हर बार नया बहाना बनाता रहा। कभी भर्ती प्रक्रिया रद्द होने की बात कही गई तो कभी हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर समय टालता रहा। नौकरी मिलने की उम्मीद में युवती लगातार आरोपी के संपर्क में रही और आर्थिक नुकसान उठाती रही।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब शाहजहांपुर में आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जानकारी सामने आई। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले से ही कई मामलों में संलिप्त रहा है और उसके खिलाफ अन्य युवतियों से भी ठगी करने के आरोप हैं। पुलिस को आशंका है कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि सुनियोजित ठगी का नेटवर्क हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार आरोपी सचिन इस समय जेल में बंद है, लेकिन उसके खिलाफ नए तथ्य सामने आने के बाद पुलिस अब उसके पुराने मामलों की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं बल्कि सरकारी नौकरी के नाम पर फल-फूल रहे फर्जीवाड़े की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। बेरोजगारी और नौकरी की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ठग युवाओं की उम्मीदों को हथियार बनाकर उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं।


