नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी अफवाहों पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक लोकप्रिय संदेश भेजने वाले मंच पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिश पर उठाया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर इसका असर पड़ा है और इसे लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या भ्रामक संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न माध्यमों से परीक्षा से संबंधित गलत जानकारियां तेजी से फैल रही थीं, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम और मानसिक तनाव पैदा हो रहा था।
संदेश मंच के संस्थापक पावेल डुरोव ने इस निर्णय की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए कहा कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को दी जा रही है। उनका कहना है कि प्रतिबंध लगाने से समस्या समाप्त नहीं हुई, बल्कि ऐसी गतिविधियां अन्य माध्यमों पर स्थानांतरित हो गई हैं।
वहीं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी नए प्रश्नपत्र लीक की घटना के कारण नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं तथा अभ्यर्थियों को गुमराह करने वाले फर्जी संदेशों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक था।
इस फैसले के बाद तकनीक और शिक्षा जगत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल माध्यमों की जिम्मेदारी तथा परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार की इस रणनीति की प्रभावशीलता और इसके व्यापक प्रभावों पर नजर रहेगी। फिलहाल पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।


