फर्रुखाबाद। ऐतिहासिक व गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल लोको फतेहगढ़ स्थिति दरगाह हज़रत मखदूम शाह सैय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में मु हर्रम महीने की 16 वी शरीफ बड़े ही धूम धाम से मनाई गई ।इस मौके पर दूर दराज से आए अकीदतमंदों ने अपने अपने तरीके से फूल वा चादर पेश की।
इस अवसर पर सभी मजहबों के जायरीनों ने हाजिरी दी और अपनी अकीदत पेश की।तकरीर में बताया गया कि इस्लामी नया साल मोहर्रम की पहली तारीख से शुरू होता है। यह महीना विशेष रूप से कर्बला (इराक़) की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है। इसमें पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे (पोते) हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत हुई थी।
खानकाह शरीफ़ के सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां ने बताया कि दरगाह का 266 वां सालाना उर्स दरगाह हज़रत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा का 28,29,30, 31, जुलाई को मनाया जाएगा
सज्जादा नशीन कहा खानकाहों से अकीदत रखना चाहिए जोकि आपसी भाई चारे को बढ़ावा देती है ये दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है। उन्होंने कहा कि , सूफी संतों ने सदैव अमन संदेश देने के साथ सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा दी है ।आज सूफी संतो की शिक्षा से दूरी हमारे भाई चारगी को समाप्त कर रही है।
उन्होंने कहा कि हर दौर में औलिया ए कराम ने अमन भाई चारगी का सन्देश इनके आस्ताने पे आने वालों को रूहानी फैज़ के साथ साथ इंसानियत का भी पैग़ाम मिलता है और सूफ़ि संतों ने समाज से बुराइयों को मिटा कर एक साफ़ समाज की बुन्याद रख्खी है।वहीं दारुल इफ्ता के मुफ़्ती व उस्ताद ग़ुलाम आसी ने बेहतरीन अंदाज में ख़िताब किया ।हाफिज अरशद साबरी ने कुल शरीफ में बेहतरीन अंदाज में क़ुरआन पाक की तिलावत कर नजरों नियाज़ पेशकर फूल और चादर पेश की।
इस मौके पर क़व्वाल कमालुद्दीन ने कलाम पेश किये
इस मौके पर अंसार साबरी,अफ़ज़ल हुसैन नियाज़ी, रफत हुसैन, हनीफ भाई,राजू भाई अरशद सबरी तनवीर खान राहुल,फैसल साबरी, आकाश, शिवम आदि मौजूद रहे।
लोको दरगाह पर धूम धाम से मनी सोलहवीं शरीफ, शुरू हुईं उर्स की तैयारियां


