एटा
जनपद में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए सुविधा के बजाय बड़ी परेशानी बनते जा रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि मीटर में रिचार्ज करने के बावजूद एक-दो दिन के भीतर ही बिजली आपूर्ति बंद हो जा रही है। इस स्थिति से उपभोक्ता खासे परेशान हैं और विद्युत विभाग के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
शहर के विभिन्न विद्युत उपकेंद्रों पर इन दिनों शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों की भीड़ बढ़ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली व्यवस्था अनियमित हो गई है और बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक आपूर्ति काट दी जाती है। इससे न केवल घरेलू काम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि छोटे दुकानदारों और व्यवसायियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई मामलों में देखा गया कि उपभोक्ताओं ने हजारों रुपये का रिचार्ज कराया, लेकिन कुछ ही दिनों में बिजली कट गई। वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की कि उनके पास किसी प्रकार का बकाया या चेतावनी संदेश नहीं आया, फिर भी बिजली आपूर्ति बाधित कर दी गई। इससे लोगों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि पहले की तरह स्पष्ट बिलिंग व्यवस्था नहीं होने से उन्हें यह समझने में कठिनाई हो रही है कि बिजली कब और क्यों कट रही है। ऑनलाइन रिचार्ज प्रणाली भी कई उपभोक्ताओं, विशेषकर बुजुर्गों के लिए चुनौती बन रही है।
आंकड़ों के अनुसार, जिले में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही तकनीकी समस्याएं और उपभोक्ता शिकायतें भी तेजी से बढ़ी हैं। इससे विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय स्तर पर बताया जा रहा है कि यदि मीटर में पुराना बकाया दर्शाया जाता है, तो पहले उसे समायोजित करना जरूरी है और भविष्य की खपत के लिए अग्रिम रिचार्ज करना होगा, तभी बिजली आपूर्ति सुचारू रह सकेगी। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
फिलहाल, बढ़ती शिकायतों को देखते हुए यह साफ है कि स्मार्ट मीटर योजना को लागू करने में कई खामियां सामने आ रही हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर सकती है।


