लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान ऊर्जा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
बैठक में यह सामने आया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए केस्को (KESCO) के निदेशक वाणिज्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही लापरवाही बरतने के आरोप में चार इंजीनियरों को प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दी गई है, जो विभागीय सख्ती का संकेत है।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जैसे ही स्मार्ट मीटर से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त हो, उसका तत्काल और प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी। इसके साथ ही भीषण गर्मी को देखते हुए बिजली की बढ़ती मांग के मद्देनजर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में ट्रांसमिशन लाइनों और ट्रांसफार्मरों के नियमित रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया, ताकि तकनीकी खामियों के कारण आपूर्ति बाधित न हो। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए कि निर्धारित शेड्यूल के अनुसार सभी क्षेत्रों में बिना कटौती के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बेहतर विद्युत व्यवस्था को लेकर दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने पर भी जोर दिया गया। विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही जारी रही, तो आगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्मार्ट मीटर प्रकरण को लेकर बढ़ती सख्ती से साफ है कि सरकार अब उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देते हुए बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाने के मूड में है।
स्मार्ट बिजली मीटर विवाद गहराया, केस्को के निदेशक वाणिज्य को नोटिस; लापरवाही पर इंजीनियरों पर कार्रवाई


