– सोमवार सुबह 8 बजे पार्थिव शरीर होगा लोहाई रोड से रवाना
– पांचाल घाट स्थित शमशान घाट पर होगा अंतिम संस्कार
फर्रुखाबाद।प्रख्यात समाजसेवी, वरिष्ठ भाजपा नेता और हजारों परिवारों के सुख-दुख की सहभागी रहीं डॉ. रजनी सरीन के निधन से जनपद शोक में डूब गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक, सामाजिक, व्यापारिक और धार्मिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों की जुबान पर एक ही बात है—”शहर ने अपनी एक ऐसी बेटी और मां को खो दिया, जिसकी भरपाई आसान नहीं है।”
77 वर्षीय डॉ. रजनी सरीन ने रविवार को लोहाई रोड स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रही डॉ. सरीन का जीवन समाज सेवा, जनसेवा और संगठन के प्रति समर्पण का पर्याय रहा। भाजपा की राष्ट्रीय कर समिति की सदस्य के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं के उत्थान और सामाजिक सरोकारों के लिए लगातार कार्य किया।
डॉ. रजनी सरीन के निधन से न केवल भाजपा परिवार बल्कि पूरा फर्रुखाबाद शोकाकुल है। उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी और आम नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।
परिजनों के अनुसार डॉ. रजनी सरीन की अंतिम यात्रा सोमवार प्रातः 8 बजे लोहाई रोड स्थित आवास से पंचाल घाट के लिए प्रस्थान करेगी, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।
डॉ. सरीन के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए शहर के व्यापारिक संगठनों ने बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। सोमवार को शहर के प्रमुख बाजार बंद रहेंगे। व्यापारियों का कहना है कि डॉ. रजनी सरीन ने सदैव समाज और व्यापारिक वर्ग की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, इसलिए उनके प्रति सम्मान प्रकट करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
डॉ. रजनी सरीन केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थीं, बल्कि वे उन विरले लोगों में शामिल थीं जिनके घर का दरवाजा हर जरूरतमंद के लिए खुला रहता था। किसी के इलाज की चिंता हो, किसी बेटी की पढ़ाई का प्रश्न हो या सामाजिक सहायता की जरूरत, डॉ. सरीन हर समय आगे खड़ी दिखाई देती थीं। यही कारण है कि आज उनके जाने पर हर आंख नम है और हर दिल उन्हें याद कर रहा है।
फर्रुखाबाद की सामाजिक चेतना, सेवा और संवेदनशीलता की पहचान बन चुकीं डॉ. रजनी सरीन भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए जनकल्याण के कार्य और उनकी आत्मीय मुस्कान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। उनकी अंतिम यात्रा केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि शहर की एक युगपुरुष समान मातृशक्ति को भावभीनी विदाई होगी। “कुछ लोग जीवन से विदा होकर भी स्मृतियों में अमर हो जाते हैं, डॉ. रजनी सरीन उन्हीं में से एक थीं।”


