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Friday, May 1, 2026

स्कूल में किताबों के साथ कापी खरीदने की जबरदस्ती, बीएसए के आदेश की उड़ रही धज्जियां

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फर्रुखाबाद। जनपद के शमसाबाद क्षेत्र स्थित के.जी. इस्तोर्गा पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय प्रशासन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद पाठ्यपुस्तकों की बिक्री में मनमानी कर रहा है।
बताया गया है कि बीएसए फर्रुखाबाद द्वारा 07 अप्रैल 2026 को जारी पत्र (संख्या 87-91/2026-27) में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि विद्यालय किसी भी छात्र या अभिभावक को किताबों के साथ अन्य सामग्री (जैसे कापी आदि) खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। इसके बावजूद संबंधित विद्यालय में इन आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
अभिभावकों के अनुसार, स्कूल के मुख्य द्वार के पास स्थित एक निर्धारित दुकान पर ही स्कूल का कोर्स उपलब्ध कराया जा रहा है। जब एक अभिभावक वहां किताबें लेने पहुंचे तो दुकानदार ने साफ तौर पर कहा कि किताबें तभी मिलेंगी जब साथ में कापियां भी खरीदी जाएं। विरोध करने पर यह भी कहा गया कि यदि केवल किताबें लेनी हैं तो 20 अप्रैल के बाद ही उपलब्ध कराई जाएंगी।
पीड़ित अभिभावक ने इस संबंध में विद्यालय से जुड़े विक्की उर्फ चुवेंद्र सिंह से फोन पर बातचीत की। आरोप है कि उन्होंने भी कापी खरीदने की अनिवार्यता की पुष्टि की और कहा कि “किताबों के साथ कापी लेना जरूरी है, नहीं तो बाद में कोर्स ले लीजिए।” जब अभिभावक ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इतना ही नहीं, जब अभिभावक ने पूछा कि स्कूल का कोर्स किसी अन्य दुकान पर उपलब्ध है या नहीं, तो विद्यालय की ओर से स्पष्ट जानकारी देने से भी इनकार कर दिया गया। इससे यह आशंका और मजबूत हो रही है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा एक विशेष दुकान को बढ़ावा देकर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
अभिभावकों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और उन्हें मजबूरी में महंगी व अनावश्यक सामग्री खरीदनी पड़ेगी।
पीड़ित पक्ष ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम को लागू कराया जाए, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके।

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